Saturday, June 26, 2021

धुंधली सी मोहब्बत


पेड़ की सांखो से टपकती, ओश की बूंदों जेसा इश्क हमारा
फितरत सी है सांखोकी, बूंदों को पल-भर में छोड़ देती है


जब तक सांखो पे हे, वो हसीन लम्हे जी लेती है बुँदे
गिरती हे जमी पे जब, तो होती है फनाह उस हसीं लम्हों को याद कर के


बूंदों का सिर्फ यही कसूर की, वो उस सांखसे मोहब्बत कर बेठे
जिसने उसे पल-भर में ठुकराया, फिर एक नयी बूंद की चाह में .. !!

मोम सा इश्क !!