Monday, December 13, 2021
Saturday, June 26, 2021
धुंधली सी मोहब्बत
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पेड़ की सांखो से टपकती, ओश की बूंदों जेसा इश्क हमारा
फितरत सी है सांखोकी, बूंदों को पल-भर में छोड़ देती है
जब तक सांखो पे हे, वो हसीन लम्हे जी लेती है बुँदे
गिरती हे जमी पे जब, तो होती है फनाह उस हसीं लम्हों को याद कर के
बूंदों का सिर्फ यही कसूर की, वो उस सांखसे मोहब्बत कर बेठे
जिसने उसे पल-भर में ठुकराया, फिर एक नयी बूंद की चाह में .. !!
Monday, February 22, 2021
ख्वाहिशो का बज़ार ...
अक्सर खाली हाथ आया हु भरे बज़ार से...
कभी खवाहीश नही होती, कभी पैसे नही होते ...!!
खुशीयो
का बज़ार अक्सर रंगीन होता है,
लाखो
खवाहीशे मर मिटटी है इस बज़ार मै..
गमो को बदलने का सौदा बदी जोर सौर से चलता है यहा !!
बेहराल
..!!
सिर्फ
एक खवाहीश है ये ...
ज़िंदगी
की खुशीया तो छोटे छोटे लम्हो मे ही हैं .!!
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